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वर्तमान और पूर्व चेयरमैन ओढेंगे भगवा चोला

पाली/हरदोई 23 जून।शोभितमिश्रा। सत्ताधारी पार्टी भाजपा में दूसरे दलों के नेता एक बाद एक शामिल हो रहे हैं जिस कडी में पाली नगर पंचायत अध्यक्ष अपने पूर्व चेयरमैन पिता के साथ भगवा चोला ओढेंगी । पूर्व नगर प्रमुख द्वारा भाजपा सरकार बनने के बाद से ही भाजपा में घुसपैठ की जा रही थी लेकिन स्थानीय संगठन से दूरी बनाए रखने से स्थानीय भाजपाइयों ने दाल नहीं गलने दी । भरखनी मंडल अध्यक्ष सहित जिलाध्यक्ष की संस्तुति के बाद रविवार को पार्टी में शामिल किये जाने का राश्ता साफ हो गया है । स्थानीय भाजपाइयों का एक गुट अब भी असहमत है पर जिलाध्यक्ष के निर्णय का खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं ।

नब्बे के दशक में पाली निवासी कांग्रेस नेता स्व पंडित राम औतार दीक्षित के सहारे राजनीति कर रहे कमलाकांत बाजपेयी को उक्त श्री दीक्षित से अनबन के बाद कई राजनीतिक सिकस्त का सामना करना पडा । कमलाकांत बाजपेयी राजनीति से मुंह मोड शून्य में सोंचने लगे और नशे को ही अपनी जिंदगी बना लिया । हर समय नशे में रहने वाले कमलाकांत बाजपेयी लगभग राजनीति से किनारा कर चुके थे । वर्ष 2000 में भाजपा के कद्दावर नेता रहे स्व गंगा भक्त सिंह ने कमलाकांत बाजपेयी को अपने सानिध्य में उनके पिता जगदीश नारायण बाजपेयी से विशेष आग्रह कर बीजेपी के सिम्बल से नगर निकाय चुनाव लडाया । जिसमें कामलाकांत बाजपेयी लगभग ढाई सौ वोटों से अध्यक्ष पद के लिये विजयी घोषित हुये । बाबू गंगा भक्त सिंह ने कमलाकांत बाजपेयी के परिवार पर आई कई बडी मुसीबतों का विष सत्ता में रहते हुए पिया ।

चंद दिनों बाद ही कमलाकांत बाजपेयी बाबू गंगा भक्त सिंह को बुरा भला कहते देखे जाने लगे । जिस कारण श्री सिंह को अपने निर्णय कमलाकांत को चेयरमैन बनाने पर पछतावा होने लगा । बताया जाता है कमलाकांत बाजपेयी ने खुलेआम श्री सिंह को गालियां देना शुरू कर दिया जिस कारण दोनों लोगों में वैमनश्यता चरम पर पहुंच गई । तबतक राजनीतिक समीकरण बदले और समाजवादी पार्टी की सरकार आ गई । विकास कार्यों में गडबडी, वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग की प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें हुई ।

बताया जाता है तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां के निर्देश पर साढे तीन साल में ही अध्यक्ष कमलाकांत बाजपेयी के अधिकार सीज कर दिये गये जोकि कार्यकाल पूरा होने तक बहाल नहीं हो सके । वर्ष 2006 के अंत में संपन्न हुये निकाय चुनाव में कमलाकांत बाजपेयी को कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की बतौर कृपा कांग्रेस से टिकट मिली और चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के साथ हर घिनौना हथकंडा अपनाया । कमलाकांत बाजपेयी का नामांकन राजनीतिक विरोधियों की शिकायत पर खारिज किया गया । कमलाकांत बाजपेयी शाहाबाद के ब्लॉक प्रमुख रहे रामनाथ त्रिपाठी के सहारे चुनाव आयोग गये जहाँ से पाली का चुनाव रद्द करने का आदेश हुआ । प्रदेश का निकाय चुनाव संपन्न होने के पश्चात पाली में अध्यक्ष पद के लिले नामांकन और मतदान हुआ । कमलाकांत बाजपेयी की जीत का अंतर पिछले चुनाव से दुगना रहा और वह लगभग 500 वोटों से विजयी हुये । चंद महीनों बाद वर्ष 2007 की प्रथम तिमाही में संपन्न हुये विधान सभा चुनाव में कमलाकांत बाजपेयी ने कांग्रेस पार्टी को दरकिनार किया ही साथ ही साथ नामांकन बहाली में सहयोगी रहे रामनाथ त्रिपाठी को भी किनारे करते हुये बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी आशिफ खां उर्फ बब्बू की मदद की ।

रामनाथ त्रिपाठी निर्दलीय चुनाव लडे और कई बार कमलाकांत बाजपेयी के घर आये सहयोग मांगने पर बैरग ही लौट गये । बब्बू खां विजयी हुये और बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी । कमलाकांत बाजपेयी के एहसान के बदले बब्बू खां ने पाली के लिये कांशीराम शहरी विकास योजनान्तर्गत करोडों रुपये स्वीकृत कराये । बताते हैं कि विकास कार्य प्रारंभ होने पूर्व ही कमलाकांत बाजपेयी ने फोन से बब्बू खां को भला बुरा कहकर कहानी विगाड ली नतीजतन बब्बू के प्रयासों से उक्त योजना शाहाबाद चली गई । पाली विकास की बांट जोह कर ही रह गया ।

जिसके पश्चात वर्ष 2009 के लोक सभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी की मदद करते देखे गये । 2012 के विधान सभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी की जमकर मदद की और भाजपा प्रत्याशी माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू व सपा प्रत्याशी डाक्टर अशोक बाजपेयी का जमकर विरोध किया । प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी । कुछ महीनों बाद संपन्न हुये नगर निकाय चुनाव में कमलाकांत बाजपेयी निर्दलीय प्रत्याशी बनकर मैदान में आये । वोट मांगने के दौरान हुये विवाद में कमलाकांत बाजपेयी व परिजनों पर धारा 307 में अभियोग दर्ज हुआ ।

नतीजा बीच में ही चुनाव छोंडकर गिरफ्तारी के भय से भागना पडा और स्वयं का भी वोट नहीं डाल सके नतीजतन सपा प्रत्याशी से साढे पांच सौ वोटों से चुनाव हार गये । 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी रहे शिव प्रसाद वर्मा का धुआंदार दौरा करते दिखे । पिछले वर्ष संपन्न हुये विधान सभा चुनाव में कमलाकांत बाजपेयी ने बसपा प्रत्याशी रहे अनुपम दुबे को जिताने के लिये चिर विरोधी बांकेलाल शुक्ला के साथ मंच साझा किया और वर्तमान भाजपा विधायक रानू सिंह के विरोध में साम दाम दंड सभी हथकंडे अपनाये पर विफल रहे । मिलनसार व्यक्तित्व, कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिये उग्र तेवर, व्यक्तित्व के धनी रानू सिंह 26 हजार से अधिक वोटों से विजयी हुये । निकाय चुनाव 2017 में सीट महिला के लिये आरक्षित होने पर कमलाकांत ने अपनी विवाहित पुत्री दीपा अवस्थी को चुनावी मैदान में उतारा जो विजयी हुई । भाजपा के स्थानीय संगठन के निशाने पर रहने वाले कमलाकांत बाजपेयी पुत्री दीपा अवस्थी चेयरमैन को भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री आज पंथवारी देवी मंदिर में होने वाली जनसभा में भाजपा की सदस्यता दिलायेंगे । अब देखना है कि कमलाकांत बाजपेयी भाजपा कैडर के लोगों को पीछे कर आगे की पंक्ति में रहते हैं या एक नये कार्यकर्ता की भांति पार्टी के कार्यों में रुचि लेते हैं

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