Home / राज्य / उत्तर प्रदेश / रविन्द्र गुरूजी ने किया प्रथम वानप्रस्थ नैमिष मठ स्थापित

रविन्द्र गुरूजी ने किया प्रथम वानप्रस्थ नैमिष मठ स्थापित

सीतापुर 21 दिसम्बर। श्याम बाबू सैनी । भू.लोक का सर्वश्रेष्ठ एवं तीरथ वर नैमिषारण्य में इस समय कोई भी वानप्रस्थ मठ या आश्रम नहीं हैए नैमिष में वानप्रस्थ नैमिष मठ की स्थापना के साथ ही यह रिक्तता भी पूर्ण हो गई है ए नैमिष तीर्थ में यह वर्तमान समय में वानप्रस्थ का प्रथम ;मठद्ध होगा . जिसका निर्माण नैमिष तीर्थ के प्रति अगाध श्रद्धाएभक्ति एसमर्पण रखने वाले चौराशी कोसी परिक्रमा समिति नैमिषारण्य दृ मिश्रित के मुख्य परामर्शक व नैमिष रत्न ए साहित्य सेवा रत्न ए मानस भूषण से अलंकृत एवं संत ह्रदय की उपाधि से बिभूषित तथा नैमिष तीर्थ को पर्यटन स्थल घोषित कराने हेतु दो दसकों से संकल्पित एवं नैमिष विकास मोर्चा के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार ए साहित्यकार ए फिल्मकार रविन्द्र तिवारी श्गुरु जीश् उर्फ़ श्री संत ह्रदय रविन्द्र गुरु वानप्रस्थी जी महाराज शिष्य श्री श्री 1008 स्वामी शांति आश्रम जी महाराज ने राजघाट के निकट वानप्रस्थ नैमिष मठ की स्थापना की है. बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री रविन्द्र श्गुरुजीश् ने बताया कि नैमिष की अति पुनीत भूमि अनादि काल से ही सनातन संस्कृति को अक्षुण्य बनाने वाली भूमि रही है इसकी गरिमाए महत्ता को लिपि बद्ध करना अत्यंत कठिन है। यह साधकों को सिद्धि प्रदान करने वाली भूमि है हमने नैमिष तीर्थ की गरिमा को पुराणों एवं धार्मिक ग्रंथो में अध्यनए चिन्तनए मन्थनए शोध किया है द्य पुराण नैमिष से हैं नैमिष पुराणों से है . लेकिन आजादी के 70 वर्ष बाद विगत 28 जून 2017 को मेरे द्वारा वर्षों से की जा रही मांग को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा के निर्देश के बाद प्रदेश पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी जी ने नैमिष तीर्थ को यथा शीघ्र पर्यटन स्थल घोषित किये जाने का हमें आश्वासन दिया है इसके लिए कोटिशः साधुवाद !
मानव जीवन की आधार भूमि है तीर्थ नैमिषारण्यए यहाँ से ही मानव में सभ्यताएज्ञान ए बैराग्यए सिध्दि ए सनातन संस्कृति का प्रादुर्भाव हुआ ए यही से मानव जीवन को चार आश्रमों में रहने की शिक्षा प्राप्त हुई .

वानप्रस्थ का अर्थ पलायन नहीं है . इसमें जीवन में जहाँ साधनाए स्वाध्यायए संयमए सेवा में निरत रहने का अनुशासन है . वहाँ एक अनुबन्ध यह भी है कि वन क्षेत्र में रहा जाय. आरण्यक ही उस उच्चस्तरीय जीवनचर्या के लिए उपयुक्त स्थान हो सकते हैं. घिचपिच बसेए कोलाहल भरे नगरों और गन्दे गली−कूचों में ऐसा वातावरण होता है जिसमें आध्यात्मिकता पनपती नहीं. उस घुटन भरी विषाक्तता में उच्चस्तरीय भावनाएँ पनपने नहीं पाती और किया हुआ स्वाध्याय तथा सुना हुआ सत्संग निरर्थक जाता है. वातावरण की श्रेष्ठता कई कारणों पर अवलम्बित है. उनमें से एक तो अनिवार्य ही है और यह है पेड़−पौधों की सघनता और निकटता. वानप्रस्थ का शब्दार्थ हैकृवन प्रदेश में निवास ऊँचे विचार ऐसे ही क्षेत्रों में पनपते और फलते− हैं.  इस लिए ऋषि आरण्यक एवं आश्रम वन−क्षेत्रों में होते पाये गये हैं. नैमिष तीर्थ तो में ही स्थित है इस लिए यहाँ वानप्रस्थ मठ या आश्रम का होना नितान्त आवश्यक था . इस रिक्तता को लेकर की गई वानप्रस्थ नैमिष मठ की स्थापना भविष्य में मील का पत्थर साबित होगी !

About Akash Shukla

Check Also

कस्बे के शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए मार्च

पिहानी, हरदोई।अरविन्द राठौर/विपुल। पुलिस अधीक्षक पश्चिमी के नेतृत्व में होली के त्यौहार को देखते हुए …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: