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सोमस्वार नथ धाम मैकपुर में राम कथा अमृत बर्षा

पचदेवरा 11 नवम्बर। श्री सोमेस्वर नाथ धाम मैकपुर में द्वतीय श्रीराम कथा का भव्य आयोजन कथा के द्वतीय दिवस कथा व्यास गोविंदाचार्य जी महाराज ने बताया कि भगवान श्री राम जी की कथा हमे बहुत निष्ठा पूर्वक सुननी चाहिए। जो भगवान की कथा सुन कर तृप्त हो जाये उन्हेंने श्री राम जी कथा का महात्म्य ही नही जान पाया । राम कथा जे सुनत अघाई, रस बिसेस जान तिन नाई, भबसागर पर करने के लिए एक मात्र कलयुग में एक साधन है भगवान की कथा, भवसागर चाह पर जो पाबा, राम कथा त कहु द्रण नाबा, इसलिए परमात्मा श्रीराम की कथा बहुत ही ध्यान पूर्वक हम सभी को सुननी चाहिए। कथा व्यास ने कहा कि राम कथा सुनने तो भगवान शंकर भी गए कुंभज ऋषी के आश्रम पर और साथ मे माता सती भी गई। किन्तु रामजी पावन कथा भोले नाथ ने सुनी सती अपमान कर दिया भगवान संकर के नाम मे एक शब्द बढ़ गया जब कथा सुनने गए तब नाम था सम्भु, एक बार त्रता युग महि संम्भू गए कुंभज ऋषि पाही, और जब कथा सुनी तब नाम हो गया महेश, राम कथा मुनि बरज भखानी, सुनी महेश परम् शुख मानी, फिर कुछ समय तक वाह रुकने बाद संकर जी चले तब नाम हो गया चार सब्द का, मुनि सन बिदा मागी त्रपुरारी, सती जीने भगवन की कथा का अपमान कर दिया था इसलिए उन्हें अंत मे अपने पिता यहाँ जाकर प्राण त्यागने पड़े, इस प्रकार राम कथा के बिषय में बताए हुए कहा कि कथा बैठे के कभी भी कथा का अपमान नही करना चाहिए। श्रीराम कथा तो राम जी का ही स्वरूप है क्योकि जब श्री राम अपने परम धाम को गए तब रामजी से हनुमान कहा प्रभू हमार क्या होगा भगवान ने हनुमान आज के बाद जब भी तुम्हे मेरी याद आये तुम मेरा दर्शन रामायण में करना में उसी में प्रवेश किये जा रहा हूँ तो राम कथा सुनने से हमारे ह्रदय हो सन्ति निश्चित मिलेंगे। कथा के मुख्य यजमान राजेन्द्र सिंह मास्टर, देवेन्द्र सिंह एवं बहुत से श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

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