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नगर का ऐतिहासिक सहजन कुआं बना कूड़ादान

बिलग्राम 12 नवम्बर। आनन्द अवस्थी/शब्बीर। नगर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक सहजन कुआं अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है क्योंकि इस की देखभाल करने वाला अब शायद कोई नहीं है इसकी ओर ना ही शासन ध्यान दे रहा और न प्रशासन इसी लिये आसपास के के रहने वाले लोगों ने इसपर कब्जा करना शुरू कर दिया है जिससे कुएं के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक और प्राचीनतम कुएं का वर्णन भारतीय इतिहास से संबंधित कई किताबों में मिलता है अकबर के दरबारी अबुल फजल द्वारा लिखी गई आईने अकबरी में कुऐं से निकलने वाले चमत्कारी पानी के बारे में लिखा है कि इस कुएं का पानी जो व्यक्ति 40 दिन पी ले तो उसकी आवाज सुरीली हो जाती है बिलग्राम के मोहल्ला सहजन जो अब कासूपेट में आता है ये कुआं अभी भी मौजूद है जो देखरेख के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है सहजन कुआं को लेकर अनेक लेखकों ने उसकी प्रशंसा करते हुए कई काव्य लिखें हैं इस संबंध में डॉक्टर शैलेश जैदी अपनी पुस्तक बिलग्राम के मुसलमान हिंदी कवि में लिखते हैं की मधनायक ने खुद अपने काव्य के माध्यम से उन्होंने इस कुएं की प्रशंसा की है मदनायक ने सिंगार में प्रष्ठ संख्या 45 पर लिखते हैं।
अति पवित्र जल गंग सम मानसरोवर रूप। तारिथ है खट दरस को कूप तडांग अनूप।।
अच्छर करवारी कलित लोज तान गुंन चेत’। रंग रतक मुद्रा मपत ताल झोंक जल लेट।।
ऐसे ही कई काव्य श्रंगार में लिखे हैं सहजन कुआं को लेकर बिलग्राम में कई किस्से मशहूर हैं कहा जाता है कि तानसेन के कानों में जब मदनायक की सुरीली आवाज पहुंची तो वो इस कदर प्रभावित हुआ कि ग्वालियर से पैदल चलकर बिलग्राम पहुंचा और सहजन कुआं के करीब दम लेने के लिए बैठ गया कुए पर उस वक्त कई पुरुष और महिलाएं पानी भर रही थी उसमें से एक औरत अपने घड़े को कुएं में पानी भरने के लिए छोड़ा घड़े के पानी में डूबते ही बुदुक बुदुक की आवाज निकलने लगी पानी भर रही औरत को यह आवाज नागवार गुजरी कहा कि मुआ बेवक्त का राग अलापता है यह कह घढा तोड़ डालती है जब यह आवाज तानसेन के कानों में पडती है वह हैरान होकर दरयाफ्त करता है यह कौन है बताया गया कि मदनायक के घर की नौकरानी है यह सुनकर कर तानसेन को और हैरत होती है और सोचता है कि मौसिकी की इस कदर जानकर जब ये नौकरानी है तो मधनायक की योग्यता का क्या आलम होगा तानसेन ने निश्चय किया कि मधनायक से मिलने की आरजू दिल में लिए ही वापस जाना पड़ेगा और वह चला गया जब मधनायक को ये खबर मिलती है कि उनका मेहमान उनसे बिना मिले ही चला गया तो परेशान होकर अपने अजीज से तानसेन को वापस बुलाकर मुलाकात कर मेहमान नवाजी करतें है।

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