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नरेश के कट्टरविरोधी अब सरपरस्ती में लड़ेंगे चुनाव

हरदोईदुर्गेेेश मिश्रा। नरेश अग्रवाल के परिवार के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष व विधानसभा के प्रत्याशी सुख सागर मिश्रा मधुर ने समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद नरेश अग्रवाल की रहनुमाई में सपा से नामांकन किया इस बीच उन्होंने खास बातचीत करते हुए कहा कि अग्रवाल परिवार से जो उनके पुराने मतभेद थे वह दूर हो चुके हैं और नरेश अग्रवाल वरिष्ठ नेता है लिहाजा अब उन्हीं के साथ रहकर चुनाव लड़ा जाएगा।

भाई की बेवफाई पर नरेश ने उठाया कदम

बता दे वर्ष 2000 से लगभग 17 साल से नरेश अग्रवाल का परिवार नगर पालिका अध्यक्ष के पद पर काबिज था नरेश अग्रवाल के छोटे भाई उमेश अग्रवाल ने भाई से गद्दारी कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था और अपनी निजी रिश्तेदारों के भरोसे अध्यक्ष पद की दावेदारी भारतीय जनता पार्टी से कर रहे थे मना जा रहा था कि उमेश अग्रवाल के करीबी रिश्तेदार जो संघ में अहम भूमिका रखते हैं व भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अच्छा दखल रखते हैं वह उनको टिकट दिलवा देंगे उमेश अग्रवाल के इस कदम के बाद नरेश अग्रवाल जो कि जिले के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि से सबसे मजबूत माना जाते है उन्होंने नई चाल चलते हुए अपने प्रतिद्वंदी माने जाने वाले सुख सागर मिश्र मधुर को अपने साथ मिला लिया और नगर पालिका अध्यक्ष पद का दावेदार समाजवादी पार्टी से बना दिया इधर भारतीय जनता पार्टी ने उमेश अग्रवाल को टिकट नहीं दिया और पारुल दीक्षित को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया मधुर का अग्रवाल परिवार से पुराना विरोध रहा है सुख सागर मिश्र मधुर 1995 से 2000 तक नगर पालिका परिषद हरदोई के अध्यक्ष रहे, इसके बाद वो दो बार नरेश के द्वारा उतारे गए प्रत्याशियों से हारे , इसके अलावा 2009 में जब नरेश अग्रवाल को राज्यसभा सांसद बनाया गया तो उनके बेटे नितिन अग्रवाल जोकि सदर विधानसभा का चुनाव लड़े उनके विरोध में सुख सागर मिश्रा मधुर ने चुनाव लड़ा और 49 हजार वोट इन्हें प्राप्त हुए इसके बाद वर्ष 2012 में भी नितिन अग्रवाल के खिलाफ सुख सागर मिश्रा मधुर ने चुनाव लड़ा ।

अभी तक माना जाता रहा कि सुख सागर मिश्रा अग्रवाल परिवार से काफी दूरियां हैं लेकिन इस नगरपालिका के चुनाव में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता कहे जाने वाले नरेश अग्रवाल ने सुख सागर मिश्रा मधुर को आगे बढ़ाया जिससे इनके बीच की आपस की दूरियां सिमट गई है सुख सागर मिश्र मधुर ने शनिवार को नामांकन पत्र का पहला सेट दाखिल किया हालांकि सुख सागर मिश्रा का पुराना राजनीतिक इतिहास रहा है।

मधुर के पिता लालन शर्मा आजादी के बाद मल्लावां विधानसभा से 3 बार विधायक चुने गए इसके बाद उनका नाम राज्यपाल की रेस में चल रहा था लेकिन इंदिरा गांधी की आकस्मिक निधन हो जाने के बाद लालन शर्मा ने राजनीति से संयास ले लिया।

शैक्षिक काल

सुख सागर मिश्र मधुर की शैक्षिक योग्यता की बात करें तो इन्होंने स्नातक करने के बाद कानून की पढ़ाई यानी LLB कर रखा है।

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