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शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित हैं धनी पुरवा के वाशिंदे

बिलग्राम, हरदोई।रिजवान अंसारी। शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से मूलभूत तरीके से वंचित ग्रामीणों को यह भी नहीं मालूम कि शासन से हम लोगों को क्या भेजा गया है।
इसी तरीके का मामला बिलग्राम ब्लॉक के अल्लीगढ़ मजरा के अंतर्गत धनीपुरवा के वाशिन्दों की जिंदगी किसी नर्क से कम नहीं है।इसी गांव में लगभग 50 पचास मकान हैं, जिनके पास पांच शौचालय हैं,वो भी चालू नहीं है शेष लोग जंगल व सार्वजनिक जगहों पर शौच करने को विवश हैं। यह तो स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार की योजना के साथ शौच मुक्त करने की जगह सीधे तौर पर योजना का मजाक उड़ाते हुए ग्रामीणों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की पोल खोलने वाली एक जमीनी हकीकत है।जिसके जिम्मेदार सम्बन्धित ग्राम सभा के प्रधान से लेकर ब्लॉक के उच्चाधिकारियों व जनपद के अधिकारियों की मिलीभगत खाऊ कमाऊ नीति ही है।
जब लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ के बारे में पता चलता है तो वह लोग अपने कागजात लेकर पंचायत मित्र रमाकांत व ग्राम प्रधान श्रीमती हुलसी देवी के पास जमा कर देते हैं। जब लाभान्वित होने की जानकारी प्राप्त करने को पंचायत मित्र के पास जाते है तो उन्हें बेइज्जत होने के सिवा कुछ नहीं हाथ लगता।ऐसा मजरा धनी पुरवा के ग्रामीणों का आरोप है। जिनके अनुसार उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता। शायद यह कारण है कि इस गांव में सड़क एक कल्पना है जो कभी साकार नहीं हो पाई। कीचड़ व गन्दगी के अंबार से अपनी दैनिक दिनचर्या के साथ नारकीय जीवन बिताना इस गांव के लोगों की मजबूरी बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके ग्राम प्रधान ने आज तक उनके अधिकारों का हनन करते हुए उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी नहीं मिल रहाद्य ग्राम वासियों बुनियादी आवश्यकताओं की मांगों को भी नहीं पूरा किया जा रहा है। ऊपर से उन्हें राज्य व केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, शौचालय, व राशनकार्ड योजनाओं से वंचित रखा। अगर ग्रामीणों के आरोपों पर गौर करें तो मौके पर जो उन्होंने दिखलाया है उसमें सड़क की स्थिति दयनीय हालत में थी। जिसे देखकर आसानी से पता चलता है कि कई दशकों से इसकी मरम्मत कार्य भी नहीं कराया गया। कुछ यही स्थिति पेयजल की जो महज गिनती के सरकारी हैंडपंपों से लोगों को दूर दराज से लाकर खाना बनाने के लिए भी इस्तेमाल करने की मजबूरी है। स्वास्थ्य सेवा केवल सरकारी एम्बुलेंस ही इन लोगों के भाग्य में है। प्रधानमंत्री द्वारा स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में जन आरोग्य योजना या फिर आयुष्मान योजना की बात करते हुए ग्रामीण बगले झांकते हैं, कुछ यही हाल प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना या फिर उज्जवला योजना उनके लिए महज कोरी कल्पना है, जिसके बारे में ग्रामीणों को यह तक पता नहीं कि उनके गांव में कितने लाभार्थी हैं। गांव में सफाई व्यवस्था स्वयं ग्रामीणों को करना प्रतिदिन की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

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