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पंडित दीनदयाल के अंत्योदय सिद्धांत पर काम कर रही भाजपा सरकार: शोभित

पाली/हरदोई। शैशव त्रिपाठी। एकात्म मानववाद के प्रणेता व भारतीय जनसंघ के संस्थापक पं0 दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि भाजयुमो द्वारा सोमवार को श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यकर्ताओं ने नगर के एक निजी स्कूल में उनके चित्र का माल्यापर्ण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। इसके बाद गोष्ठी का आयोजन कर उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर चर्चा की और उनके बताये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के पहला वोट मोदी को संकल्प अभियान के विधानसभा संयोजक शोभित मिश्रा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पं दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रृद्धा सुमन अर्पित किये। शोभित मिश्रा ने कहा कि भारतीय जनसंघ जो कि वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी है और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है उसके संस्थापक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात कर भाजपा कार्य कर रही है। उनके एकात्म मानववाद व अंत्योदय के सिद्धांत पर देश में मोदी व प्रदेश में योगी जी के नेतृत्व में सरकार कार्य कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचा रही है। विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर गाँव, गरीब, किसान आदि सभी वर्गों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। आगे कहा कि दीनदयाल जी के अंत्योदय व एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को जन जन तक लेकर जाना है और समाज के हर वर्ग को सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुचाने के लिए हम भाजयुमो कार्यकर्ता कार्य करेंगे।
विधानसभा संयोजक ने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय अपने एक मित्र बलवंत महाशब्दे की प्रेरणा से सन 1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवकसंघ में सम्मिलित हुए। उसी वर्ष उन्होंने बी.ए. की परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। अपनी चाची के कहने पर दीनदयालजी एक सरकारी प्रतियोगितात्मक परीक्षा में सम्मिलित हुए। इस परीक्षा में वो धोती और कुरता पहने हुए थे और अपने सर पर टोपी लगाए हुए थे अन्य परीक्षार्थी पश्चिमी ढंग के सूट पहने हुए थे। मजाक में उनके साथियों ने उन्हें पंडितजी कह कर पुकारना शुरू कर दिया आगे चलकर उनके लाखों प्रशंसक और अनुयायी आदर और प्रेम से उन्हें इसी नाम से पुकारने वाले थे। इस परीक्षा में भी उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
पंडित दीनदयाल जी इसके बाद बी.टी. का कोर्स करने के लिए प्रयाग इलाहाबाद आ गए और यहाँ पर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा जारी रखी। बी.टी. का कोर्स पूरा करने के बाद वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पूर्णकालिक रूप से समर्पित हो गए और संगठक के रूप में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में आ गए। जिसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संगठक प्रान्त प्रचारक रहे। 21 सितम्बर सन 1951 के ऐतिहासिक दिन उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक राजनीतिक सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इसी सम्मेलन में देश में एक नए राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ की राज्य इकाई की स्थापना हुई इसके एक माह के बाद 21 अक्टूबर सन 1951 को डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ के प्रथम अखिल भारतीय सम्मेलन की अध्यक्षता की।
दीनदयालजी में संगठन का अद्वितीय और अद्भुत कौशल था। समय बीतने के साथ भारतीय जनसंघ की विकास यात्रा में वह ऐतिहासिक दिन भी आया जब सन 1968 में विनम्रता की मूर्ति इस महान नेता को दल के अध्यक्ष के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। अपने महती उत्तरदायित्व के निर्वहन और जनसंघ के देशभक्ति का सन्देश लेकर दीनदयालजी ने दक्षिण भारत का भ्रमण कियाद्य 11 फरवरी सन 1968 का दिन देश के राजनीतिक इतिहास में एक बेहद दुखद और काला दिन है। इसी दिन अचानक पंडित दीनदयालजी को आकस्मिक मौत के मुंह में धकेल दिया गया और मुगलसराय रेलवे स्टेशन के निकट चलती रेलगाड़ी में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी आकस्मिक मौत हो गयी। इस अवसर पर अजीत बाजपेयी, रवि सिंह, राजन शुक्ला, गोपाल दीक्षित, सुंदरम् मिश्रा, सत्यम बाजपेयी आदि लोग प्रमुख रुप से मौजूद रहे।

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