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पीर को मानो लेकिन माँ के पैरों तले जन्नत

शाहाबाद/हरदोई 28 अक्टूबर।मो0गुल्फामखां। नगर के मोहल्ला कटरा में हजरत सै0सवालेह मियाँ रह0की दरगाह पर एक अजीमुश्शान जलसा जिक्रे शोहदाए कर्बला और उवैसी कान्फ्रेंस का एहतमाम किया गया।जिसमें हजरत सै0उवैस मुस्तफा कादरी वास्ती किबला की सरपरस्ती में मुकामी और तमाम बहरूनी उलमा, मशाइख, शोरा ने शिरकत की। सदारत शाही इमाम जामा मस्जिद हाफिज मकसूद हसन अजहरी ने की। निजामत के फराएज अल्हाज हाफिज सै0 आशिकुल कादरी ने बखूबी अंजाम निभाया।
शायरे इस्लाम दाबर रजा संडीलवी,हस्सान रजा,ने नातेपाक सुनाकर लोगों को मसरूर किया।मौलाना आसिफ रजा मिस्बाही ने तकरीर कर लोगों को बताया नबी के रास्ते पर और नवासए रसूल हजरते हुसैन रजि0के रास्ते पर चलने की नसीहत को बखूबी समझाया और कहा आज मुसलमान को सर कटाने की जरूरत नही है बल्कि अल्लाह की बारगाह में सर झुकने की जरूरत है।
हिदुस्तान की मशहूर व मारूफ खानकाह,खानकाहे फातहे बिलग्राम से हजरत सै0उवैस मुस्तफा कादरी वास्ती किबला के तशरीफ लाने पर मौजूद अकीदतमंद और मुरीदीन उनके इस्तकबाल के लिए खड़े हो गए और उनकी दस्त बोसी व कदम बोसी करने के लिए ताबड़तोड़ जुट गए उसपर उन्होंने फरमाया कि मुर्शिद की मोहब्बत में मुरीदीन इस कद्र जोश दिखा रहे हो। मैं पूछता हूँ क्या आप लोग इसी तरह की मोहब्बत के साथ अपनी माँ की कदम बोसी करते हो।और बाप के इस्तकबाल के लिए खड़े होते हो।मालूम हो कि माँ के कदमों के नीचे जन्नत और बाप जन्नत का दरवाजा हैं।पीरो मुर्शिद को मानो लेकिन माँ बाप के हुकूक पहले मानो।दीन के रास्ते पर चलो नमाज की पाबंदी करो।
हजरत ने बताया जलसे का मकसद क्या होता है जलसा हो या मिलाद हो या उर्स हो मकसद सिर्फ होता है कि रसूलेपाक की सुन्नतों पर अमल करने की बात खलीफा या बुजुर्गानेदीन की जिन्दगी को अपनी जिंदगी मे उतारने की कोशिश करना जलसे का अस्ल मकसद होता है इस भीड़ में से एक ने भी सच्चे दिल से तौबा कर उलमा के बताए रास्ते पर अपनी जिंदगी गुजारी तो अल्लाहपाक खुश होकर यहाँ पर आए सभी की मगफिरत फरमाएगा।
दावतुससुगरा जद्देआला वास्ती चिश्ती रह0 ख्वाजा अजमेरी के पास गये उन्होंने कहा मुझे मुरीद कर लो ख्वाजा साहब ने फरमाया तुम्हारा हिस्सा कुतुब के पास है उसके बाद हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रह0की बारगाह में हाजिर हुए और मुरीद हुए उन्होंने खिलाफत अता की।सन 1406ई0 में बिलग्राम तशरीफ लाए। आठ सौ साल से ये सिलसिला चला आ रहा है।उसी सिलसिले की एक कड़ी मैं हूँ। मेरे पीरो मुर्शिद ने जब मुझे गददी पर बिठाया।गददी पर बिठाने के बाद कुछ खानदानी अमानते होती है। उनको मेरे सुपुर्द किया।उसके बाद नसीहत की जाती है कुछ बातें ऐसी होती है। जहाँ जाओ सबको बताओ कुछ ऐसी भी बातें बताई जो किसी को भी नहीं बताना।सिर्फ अपने सीने में पैमिस्त कर लो। हाँ जब तुम किसी को गददी पर बिठाना तो सिर्फ उसको ही बताना।जहाँ भी जाना मुरीदीन में आम करते रहना कि मसलके आला हजरत पे मजबूती से कायम रहो।हमलोग मसलके हनफी हैं हनफी मुसलमान है। मसलके आला हजरत सिर्फ हमलोग इम्तियाज के लिए कहते हैं। उसके बाद हजरत ने मुल्क में अमनो चैन व सलामती के लिए दुआ की। इस मौके पर मो0 इरफान उवैसी, नूर मोहम्मद इराकी,शान मोहम्मद इराकी, मो0 शफी, मो0 वसी, मो0 तकी उवैसी,मो0 निहाल उवैसी, मो0 हस्सान उवैसी, मो0 रईस उवैसी, मो0 दिलशाद उवैसी, सहित हजारो अकीदतमंद मौजूद रहे।

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