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PHD रिसर्च के लिए जर्मन हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूट द्वारा सम्मानित

मल्लावां/हरदोई 12 नवम्बर।अभिनव मिश्रा। स्वीडन में पीएचडी रिसर्च के लिए मल्लावां के अरुण कुमार को लंदन में जर्मन हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूट द्वारा प्रत्येक वर्ष सबसे अच्छी रिसर्च के लिए पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने। पहले यह पुरस्कार ऑक्सफोर्ड व कैम्ब्रिज जैसे विश्वविद्यालय के जर्मन, व अंग्रेजी नागरिकों को दिया जाता था।
मल्लावां के गांव कलेनापुर निवासी अरुण कुमार को स्वीडन में पीएचडी रिसर्च के लिए लंदन में जर्मन हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूट द्वारा सबसे अच्छी रिसर्च के लिए पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही एक लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया गया।
अरुण की प्रारंभिक शिक्षा मल्लावां के बीएन इंटर कालेज में हुई। उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टीफेन कालेज से टॉप किया। फिर एमए किया । तब जर्मन सरकार ने उन्हें 4 वर्ष की क्षात्रवृति देकर जर्मनी की गौरीगेन यूनिवर्सिटी में बुला लिया और रिसर्च शुरू की और अपनी रिसर्च 2017 में जमा की । और अपने काम को इंग्लैंड, कनाड़ा, ब्राजील,स्विट्जरलैंड, जैसे देसो में प्रस्तुत किया। अरुण की रिसर्च गरीब पिछड़े वर्ग की शिक्षा पर आधारित है। उनका मानना है भारत और बाहर जाने पड़ने जाने वाले छात्रों को संस्थाओं में गरीब व पिछड़े वर्ग और क्षेत्र के लोगो को बराबर हिस्सा मिलना चाहिए। और सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले।
ग्रामीण परिवेश में पले पढ़े अरुन के पिता महेश चंद्र सैनिक है। तो माँ गृहणी है। उन्होंने अपना अवार्ड अपने गांव और मल्लावां व परिवार वालो को समर्पित किया है। अरुन की माँ निशा देबी, व बाबा छोटेलाल आज भी गाव कलेनापुर में रहते है। उनका उद्देश्य भारत वापस आकर एक कॉलेज खोलने की है। जिसमे अच्छी शिक्षा सबको दे सके। अव अभी स्वीडिश यूनिवर्सिटी में रिसर्चर की पोस्ट पर कार्यरत हैं।

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